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चल सखी वंशीवट , यमुना निकट...
जहाँ
होरी खेले
मोर मदन गोपलवा,
होरी खेले
लाली मनोहारी बरन बसंती
फूल फले फुले
बकुल रसलवा
फल फुले
कास कास चोली चीर
पिचकारी भर-भर भर-भरे
भर अबीर गुलाल भर-भरे
वारि बनवारी गारी
गई के सुनावे... अलबेली
आली चलली अचलवा... अलबेली
जन हरिनाथ हो
हरखे तन मनवा... अलबेली
मधुरी आली
आली चलली अचलवा... अलबेली

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