मेरी माँ की डायरी- मगही गीतों का संग्रह है| यहाँ झूमर में भजन है तो शादी ब्याह के गीतों में गाए जानेवाले गालियाँ भी हैं | ये सारे लोकगीत मगध की धरती के हैं जिन्हें मेरी माँ ने बचपन से अब तक एक कॉपीनुमा डायरी में सहेज रखा है | डायरी के फटते हुए पन्नों को इस ब्लॉग के माध्यम से मैंने मेरी माँ के लिए सहेज रखा है | इन गीतों के रचनाकार कौन हैं, नहीं मालुम | लेकिन ये गीत वाकई सरस हैं... मगही गीतों का रसास्वादन के लिए यहाँ पधारने के लिए धन्यवाद|
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Saturday, October 11, 2014
उर्वा (उषा)- अनिरुद्ध - झूमर (मगही)
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| (Source-http://www.assaminfo.com/) |
उरवा सुंदरी नारी सब सखियन में
देखली राते
अनिरुद्ध के सपनवा देखली राती
चित्रलेखा सखी जगावन जाए रोवन लागे
नीर भरी के नयनवा रोवन लागे
चित्रलेखा सखी उरवा से पूछे बात काहे कारण
सखी मन हे मलिनवा
चक्र सुदर्शन हथी रखवरवा
कठिन भाई सखी उनका मिलनवा
विष्णु रूप धरी बैठूं मंदिर में
उडाये लाने सेज सहित असनवा
इतर गुलाब उर्वा छिडकन लागे
होवन
लागे नीर बसी के सवनवा
मंगल सुदिन दिन बीतल ओही दिनवा
बिहसी
बोले हरिनाथ के सजनवा
मैया यशोदा हे राउर दुलरू गागर देलन फोर
मैया यशोदा हे
राउर दुलरू गागर देलन फोर
कथी के उजे गागर बनी है,
कथीनी लागल डोर |
मैया यशोदा...
सोने के उजे गागर बनी है
रेशम लागल डोर |
मैया यशोदा...
सोरहो श्रींगार बतीसो अभरनवा
माटी मिलवलन मोर |
मैया यशोदा...
का हम कहूँ मैया अपन नतीजवा
पुतहु भेलियो तोर |
मैया यशोदा...
जब हम चलनी ओरहन देवे
भगले जंगल के ओर |
मैया यशोदा...
सरही दास प्रभु तुम्हरे दर्श के
हथी कन्हैया चितचोर |
मैया यशोदा...
वंशी-वट की होरी- झूमर
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| (source- Google search | vimlapatil.com) |
चल सखी वंशीवट , यमुना निकट...
जहाँ
होरी खेले
मोर मदन गोपलवा,
होरी खेले
लाली मनोहारी बरन बसंती
फूल फले फुले
बकुल रसलवा
फल फुले
कास कास चोली चीर
पिचकारी भर-भर भर-भरे
भर अबीर गुलाल भर-भरे
वारि बनवारी गारी
गई के सुनावे... अलबेली
आली चलली अचलवा... अलबेली
जन हरिनाथ हो
हरखे तन मनवा... अलबेली
मधुरी आली
आली चलली अचलवा... अलबेली
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