Saturday, October 11, 2014

उर्वा (उषा)- अनिरुद्ध - झूमर (मगही)


(Source-http://www.assaminfo.com/)

उरवा सुंदरी नारी सब सखियन में देखली राते
अनिरुद्ध के सपनवा देखली राती

चित्रलेखा सखी जगावन जाए रोवन लागे
नीर भरी के नयनवा रोवन लागे

चित्रलेखा  सखी उरवा से पूछे बात काहे कारण
सखी मन हे मलिनवा
चक्र सुदर्शन हथी रखवरवा
कठिन भाई सखी उनका मिलनवा
विष्णु रूप धरी बैठूं मंदिर में
उडाये लाने सेज सहित असनवा

इतर गुलाब उर्वा छिडकन लागे 
होवन लागे नीर बसी के सवनवा

मंगल सुदिन दिन बीतल ओही दिनवा 
बिहसी बोले हरिनाथ के सजनवा

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